mohabbat ka sikandar poetry
मोहब्बत को अगर जीतने से कोई जीत सकतातो कब काकोई ना कोई सिकंदर बनके इसे जीत लेताऔर ये किसी एक की हो के रह जातीमोहब्बत तोमोहब्बत में हार जाने से मिलती हैलकिनमोहब्बत में हार जानाहारना नहीं होतामिट जाना होता हैफ़ना होना होता हैमोहब्बत में हारने वाला हीमोहब्बत का सिकंदर है ।"चौहान"
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